Monday, January 21, 2019

تجديد الثقة في رئيسة الوزراء البريطانية يعزز الجنيه الاسترليني

تماسك الجنيه الاسترليني أمام اليورو إثر فوز رئيسة الوزراء البريطانية بثقة البرلمان بعد يوم من رفض اتفاقها للخروج من الاتحاد الأوروبي.
وصمدت تيريزا ماي أمام سحب الثقة الذي طرحه زعيم المعارضة، جيريمي كوربن، بفضل دعم نواب حزبها الغاضبين، وكذا نواب الحزب الوحدوي الديمقراطي الأيرلندي.
ويفتح رفض البرلمان لاتفاق تيريزا ماي مع الاتحاد الأوروبي الباب أمام خيارات أخرى، من بينها تأجيل الخروج إلى ما بعد 29 مارس/ آذار، أو إجراء استفتاء آخر، وإن كانت رئيسة الوزراء استبعدت في وقت سابق هذه الخيارات.
ويرى الخبير الاقتصادي، دين تيرنر، إن "عدم وضوح الرؤية بشأن ما الذي سيحدث بعد رفض الاتفاق يجعل من غير الحكمة المراهنة على توجه الجنيه الاسترليني حاليا".
وقد ارتفع سعر الجنيه بنسبة 0،05 في المئة أمام الدولار بعدما انخفض بنسبة 1 في المئة في أول اليوم.
وكانت العملة البريطانية هبطت بنسبة 7 في المئة في عام 2018 بسبب الشكوك بشأن شروط بريطانيا للخروج من الاتحاد الأوروبي.
وقال محافظ البنك المركزي، مارك كارني، إن ارتفاع سعر الجنيه الاسترليني بعد هزيمة، تيريزا ماي، سببه أن المستثمرين شعروا بانحسار مخاطر الخروج دون اتفاق، أو أن آجال الخروج سيجري تمديدها.
ويضيف محللون آخرون أن "توقعات أن تسعى ماي إلى كسب دعم النوب من مختلف الأحزاب تساهم في طمأنة المستثمرين، لأن ذلك سيؤدي في النهاية إلى حصول توافق، وأن بريطانيا تتجه نحو خروج "أكثر تنظيما".
ويرى المحللون أيضا أن الأسواق متفائلة بشأن الجنيه الاسترليني على المدى القصير.
تعرضت الصادرات الصينية لأكبر انخفاض لها خلال عامين في ديسمبر/كانون الأول، بحسب أحدث البيانات التجارية.
وانخفضت الصادرات الصينية بنسبة 4.4 في المئة الشهر الماضي، مقارنة بالعام الماضي، كما انخفضت الواردات بنسبة 7.6 في المئة.
وتشير آخر البيانات إلى تعرض ثاني أكبر اقتصاد في العالم إلى مزيد من الضعف، وأدى ذلك إلى انخفاض أسواق الأسهم الآسيوية الاثنين.
وتظهر أحدث البيانات التي نشرت اليوم الاثنين أن فائض البلاد التجاري مع الولايات المتحدة بلغ أعلى معدل له في 2018.
وقد ارتفع الفارق بين ما تصدره الصين وما تستورده من الولايات المتحدة بنسبة تقدر بـ17.2 في المئة، فبلغ 323.32 مليار دولار أمريكي العام الماضي.
وأدى نجاح الصين في بيع منتجاتها إلى الدول الأخرى إلى غضب الرئيس الأمريكي دونالد ترامب، وبدئه حربا تجارية مع بكين بهدف الحد من صادراتها.
وأفضى ذلك بالشركات إلى دفع الصادرات أكثر من أجل محاولة استباق تطبيق الرسوم الجمركية الجديدة.
وبدأت الدولتان الكبريان - بعد حوالي عام من فرض الرسوم الجمركية الجديدة على قائمة متزايدة من المنتجات الصينية، مع رد بكين بالمثل - محادثات الأسبوع الماضي تهدف إلى إنهاء الصراع بينهما.
تدهور "لافت للأنظار"
وكان لانخفاض الطلب في الصين نفسها تأثير كبير على شركات معينة.
فقد حذرت شركة أبلأوائل هذا الشهر من أن عوائدها قد تنخفض أكثر مما كان متوقعا، لأسباب منها تباطؤ الاقتصاد في الصين. وتضررت أيضا شركة جاغوار -لاند روفر لصناعة السيارات بسبب ضعف المبيعات في الصين.
وتشير بيانات شهر ديسمبر/كانون الأول التجارية إلى أن الاقتصاد ربما يكون تباطؤه أسرع مما كان يخشى.
وقالت الخبيرة في الاقتصاد الآسيوي، فريا بيميش، إن: "حجم الانخفاض في الصادرات والواردات كليهما أمر لافت للأنظار، إذ هبط الاثنان أكثر في ديسمبر/كانون الأول، بعد انخفاض ملحوظ في نوفمبر/تشرين الثاني".
وأضافت أن ما شهده الاقتصاد من تعاف في الأشهر الماضية كان مرجعه التدافع على الشراء قبل بدء تطبيق الرسوم الجمركية الجديدة. لكن التجارة الآن في مستوى أقل مما سبق.

Sunday, November 11, 2018

नोटबंदी के बाद तीन गुना बढ़ा डिजिटल लेनदेन

नोटबंदी के दो साल बाद देश में होने वाले डिजिटल लेनदेन में काफी बढ़ोतरी हुई है. इस साल अगस्त में देश में 244.81 करोड़ डिजिटल लेनदेन हुए. यह आंकड़ा अक्टूबर, 2016 से अब तक हुए डिजिटल लेनदेन में तीन गुना से अधिक की बढ़ोतरी को दिखाता है. सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिटल लेनदेन को लेकर शुक्रवार को आंकड़े जारी किए.
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है, 'नए भुगतान माध्यम-भीम यूपीआई, आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एईपीएस) और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (एनईटीसी) ने व्यक्ति से व्यक्ति और व्यक्ति से कंपनी के बीच भुगतान को बढ़ावा देकर डिजिटल भुगतान के तंत्र को पूरी तरह बदल दिया है.'
डिजिटल पेमेंट पसंद है
मंत्रालय के मुताबिक आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि अक्टूबर, 2016 में 79.67 करोड़ डिजिटल लेनदेन हुए थे. अगस्त, 2018 में यह आंकड़ा 207 प्रतिशत बढ़कर 244.81 करोड़ तक पहुंच गया. इस तरह से नोटबंदी के बाद से अब तक डिजिटल ट्रांजेक्शन में लगभग तीन गुना इजाफा हुआ.
अगर रुपये के संदर्भ में इस डिजिटल लेन-देन को देखा जाए तो अक्टूबर 2016 में 108.7 लाख करोड़ रुपये के डिजिटल लेनदेन हुए थे. जबकि अगस्त 2018 में ये आंकड़ा 88 प्रतिशत बढ़कर 204.86 लाख करोड़ रुपये हो गया. मंत्रालय के बयान में कहा गया है, 'पिछले दो साल में भारत में डिजिटल भुगतान लेनदेन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.'
बता दें कि 8 नवंबर 2018 को नरेंद्र मोदी सरकार ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों पर रोक लगा दी थी. सरकार के इस कदम के बाद ऑनलाइन लेन-देन को जबर्दस्त बढ़ावा मिला था।
 और UPI को बड़ा फायदा
मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक अक्टूबर 2016 में भीम और यूपीआई आधारित लेन-देन की संख्या मात्रा 1.03 लाख थी. रुपयों के संदर्भ में इसका मूल्य मात्र 48 करोड़ रुपये था. अक्टूबर 2018 में भीम और यूपीआई आधारित लेन-देन की संख्या बढ़कर 48.2 करोड़ हो गई, जबकि इसका मूल्य बढ़कर 74,978.2 करोड रुपये हो गया.
इस कारोबारी हफ्ते के आख‍िरी दिन शेयर बाजार ने गिरावट के साथ कारोबार समेटा है. शुक्रवार को सेंसेक्स 79 अंक गिरा है. वहीं, निफ्टी भी नीचे आया है. यह 13 अंक गिरकर बंद हुआ है.
शुक्रवार को सेंसेक्स 79.13 अंक गिरकर 35,158.55 के स्तर पर बंद हुआ है. निफ्टी की बात करें तो इसने 13.20 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार समेटा है.
कारोबार खत्म होने के दौरान यस बैंक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड, अडानीपोर्ट्स और एश‍ियन पेंट्स के शेयर हरे निशान के ऊपर बंद हुए हैं. दूसरी तरफ, भारती एयरटेल, इंफोसिस, हिंडाल्को और गेल के शेयर लाल निशान के नीचे बंद हुए हैं.
इससे पहले सुबह शेयर बाजार ने गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. शुक्रवार को निफ्टी 10699 के नीचे खुला. वहीं, सेंसेक्स ने 200 अंक गिरकर कारोबार शुरू किया.शुक्रवार को सेंसेक्स ने 209.46 अंकों की कटौती के साथ 35028.22 के स्तर पर कारोबार शुरू किया. निफ्टी की बात करें तो यह भी 50.50 अंक गिरकर खुला. इस कटौती के साथ यह 10547.90 के स्तर पर खुला.

Wednesday, October 10, 2018

पटना : पांच लाख दो, सरकारी नौकरी लो, दो जालसाज गिरफ्तार

पटना : पांच लाख दो और सरकारी विभागों में नौकरी लो. कुछ इसी तर्ज पर जालसाजों की ओर से नौकरी देने का खेल खेला जा रहा था. जालसाजों ने जक्कनपुर थाने के मीठापुर बस स्टैंड में स्थित दर्पण होटल में किराये का कमरा लेकर नौकरी बांटने का कार्यालय बना रखा था. 
इसका खुलासा उस समय हुआ, जब पटना पुलिस की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दर्पण होटल में छापेमारी की और वहां से दो जालसाजों ज्योति प्रकाश (शेखपुरा वासी)  व निकेश कुमार (बेल्छी वासी) को गिरफ्तार कर लिया गया.
 
उन दोनों के पास से  नकली वोटर आईडी, भारत सरकार का होलाेग्राम युक्त स्टिकर, लैपटॉप, कई छात्रों के एडमिट कार्ड, एक लाख नकद, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, चेक व बाइकें बरामद की गयीं हैं. ये दोनों केंद्र सरकार, रेलवे व बिहार सरकार में विभिन्न पदों पर नौकरी के नाम पर छात्रों से लाखों रुपये की उगाही कर रहे थे. सूत्रों का कहना है कि दर्जनों छात्रों से ये लोग नौकरी दिलाने के नाम पर एडवांस के रूप में एक लाख से दो लाख ले चुके थे. 
 
इसके अलावा नौकरी में ग्रेड तृतीय के पदों पर नियुक्ति के लिए ये पांच लाख की डिमांड करते थे. इन लोगों के पास से कई एटीएम कार्ड व चेक बरामद किये गये हैं. नौकरी के लिए छात्रों ने इन्हें चेक से पैसे दिये थे. 
 
पुलिस इनके एटीएम कार्ड को खंगालने में जुटी है. एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों के भी नामों की जानकारी मिली है और उन सभी को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है.
 
बनाते थे नकली वोटर आईकार्ड, बेच रहे थे भारतीय नागरिकता : इन दोनों शातिरों के पास से पुलिस ने फर्जी वोटर आईकार्ड बरामद किया है. इसके साथ ही वोटर आईकार्ड में लगने वाले भारत सरकार के होलोग्राम के स्टीकर भी मिले हैं. इन दोनों के पास भारत सरकार के होलोग्राम लगे स्टिकर कहां से आये हैं, यह आश्चर्य का विषय है.
पटना : संशोधित डीपीआर को कैबिनेट की मंजूरी के बाद पटना मेट्रो एक कदम और आगे बढ़ गया है. केंद्र सरकार की सैद्धांतिक सहमति प्राप्त करने के लिए स्वीकृत डीपीआर बुधवार को ही भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय, नीति आयोग और वित्त मंत्रालय को भेज दिया जायेगा. केंद्र व राज्य सरकार की सक्रियता को देखते हुए डेढ़ से दो महीने में प्रस्ताव पर सहमति मिलने की उम्मीद है. केंद्र की सहमति मिलते ही केंद्रांश राशि के साथ ही विदेशी कर्ज का रास्ता भी साफ हो जायेगा. 
 
7437.48 करोड़ खर्च करेगी राज्य सरकार
 
इसके साथ ही 7837.56 करोड़ रुपये का कर्ज एडीबी, जीका या बाहरी स्रोतों से कर्ज के तौर पर लिया जायेगा. केंद्र सरकार महज 2612.52 करोड़ ही देगी. यह प्रोजेक्ट पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. 
 
अब एक्टिव होगा पीएमआरसी      
 
कैबिनेट मंजूरी मिलते ही नवगठित पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (पीएमआरसी) अब एक्टिव हो जायेगा. 2000 करोड़ रुपये अधिकृत पूंजी की इस कंपनी के चेयरमैन (चैतन्य प्रसाद, नगर विकास एवं आवास विभाग) और एक निदेशक (संजय दयाल, विशेष सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग) अधिसूचित हो चुके हैं, जबकि वित्त, पथ, ऊर्जा और परिवहन विभाग के निदेशकों के नाम मांगे गये हैं. 
 
एमडी की नियुक्ति राज्य सरकार करेगी. बतौर कंपनी अधिसूचित होते ही कॉरपोरेशन अंतरिम कंसलटेंट, डिटेल डिजाइन कंसल्टेंट व जनरल कंसल्टेंट की नियुक्ति के साथ ही भू-अर्जन संबंधित मुद्दों पर काम शुरू कर देगा. केंद्र की मंजूरी के बाद मेट्रो रेल  पॉलिसी  2017 के अनुसार ज्वाइंट  एसपीवी का गठन होगा, जिसमें चेयरमैन  भारत सरकार के  जबकि एमडी बिहार  सरकार के नॉमिनी होंगे. पांच नये केंद्रीय निदेशक भी  जुड़ेंगे.
 
पांच रूटों पर अनुशंसा     
 
डीपीआर तैयार करने वाली कंपनी राइट्स ने शहर में पांच रूटों पर मेट्रो चलाने की अनुशंसा की है, जिसमें से दो रूट की डिटेल रिपोर्ट बनायी गयी है. 
 
इन्हीं दो रूटों इस्ट-वेस्ट कॉरिडोर और नॉर्थ साउथ कॉरिडोर पर पहले चरण में काम शुरू होगा. दोनों  कॉरिडोर की कुल लंबाई 31.39 किमी होगी, जिसमें कुल 24 मेट्रो स्टेशन होंगे. इसमें 15.38 किमी का भाग एलिवेटेड यानि सड़क के ऊपर जबकि 15.75 किमी भाग अंडरग्राउंड यानि सड़क के नीचे रहेगा. 12 मेट्रो स्टेशन एलिवेटेड और 11 स्टेशन अंडरग्राउंड जबकि एक सड़क के बराबर आयेंगे.
 
अब तक का सफर        
 
- 18 जून 2013 को संकल्प निर्गत  - 11 नवंबर 2013 तक नागरिकों से मांगे सुझाव  - राशि इकट्ठा करने को 28 जनवरी 2015 को इन्वेस्टर मीट - नौ फरवरी 2016 को राज्य कैबिनेट की मंजूरी  - मार्च 2016 में डीपीआर मंजूरी के लिए केंद्र को भेजी गयी  - अगस्त 2017 में नयी मेट्रो पॉलिसी लांच, प्रस्ताव वापस - अक्तूबर 2017 में एनआईटी-राइट्स को मिली संशोधित डीपीआर तैयार करने की जिम्मेवारी  - मई 2018 में राइट्स ने संशोधित डीपीआर नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपा  - जून 2018 में लोहिया पथ चक्र की वजह से बेली रोड पर मेट्रो का पुन: डिजाइन बदला  - सितंबर 2018 में आवश्यक संशोधन कर डीपीआर विभाग को समर्पित - 09 अक्तूबर 2018 को कैबिनेट से संशोधित मेट्रो प्रस्ताव को मंजूरी.

Friday, September 28, 2018

जानकारी व आपके स्वास्थ्य और कैरियर संबंधी सलाह।

आप का दिन अनुकूल रहेगा। आप तन-मन से स्वस्थ होकर कार्य कर पाएंगे, जिससे कार्य में उत्साह एवं उर्जा अनुभव करेंगे। रोमांसः परिवारजनों के साथ आनंद एवं उल्लास से समय बीतेगा। करियरः  आर्थिक लाभ होगा। कार्यालय में कर्मी सहयोग करेंगे।
आज होने वाली घटनाओं से आप चिंतित रहेंगें। स्वास्थ्य खराब होने और आंखो में कष्ट होने की संभावना है। रोमांसः जीवनसाथी संग किसी मनमोहक स्थान पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। करियरः  खर्च अपेक्षा से अधिक होगा और घोर परिश्रम के बाद ही सफलता मिलेगी।
आज अनेक रूप से लाभ होने के कारण आपके हर्षोल्लास में दोगुनी वृद्धि होगी। रोमांसः मित्रों से हुई मुलाकात से आनंद मिलेगा। विवाहोत्सुकों को योग्य जीवनसाथी मिल सकता है। करियरः  व्यवसाय में लाभ होगा। आर्थिक तौर पर खुद को सशक्त महसूस करेंगे।
आज का दिन आप के व्यवसाय के लिए लाभदायी है।  दिन के कार्यभार से कुछ थकान का अनुभव होगा। रोमांसः प्रेमीजनों के लिए आज का दिन आनंदमयी रहेगा। गृहस्थजीवन आनंदपूर्ण बीतेगा। करियरः  पदोन्नति की पूरी संभावना है। धन संपत्ति, मान सम्मान के अधिकारी बनेंगे।
आज का दिन धार्मिक प्रवृत्तियों में व्यतीत करेगें एवं स्नेहीजनों के साथ किसी धार्मिक स्थल पर जाने का सुनहरा अवसर है। रोमांसः पार्टनर संग कहीं घूमने जा सकते हैं। करियरः  व्यवसाय में बाधा उपस्थित होने की संभावना है व पदाधिकारियों की अप्रसन्नता के कारण दुखी होने की संभावना भी है।
आज वाणी संयम रखने का सूचन करते हुए यह कहते हैं कि आज किसी नए कार्य का प्रारंभ न करें और क्रोध एवं आवेश में वृद्धि न आए इसका ध्यान रखें। रोमांसः जीवनसाथी संग किसी बात पर मनमुटाव हो सकता है। करियरः  व्यवसाय में लाभ-हानि दोनो ही देखने को मिल सकते हैं।
आज मनोरंजन साधनों एवं वस्त्रालंकारों की खरीदी का योग है। रोमांसः आज का दिन में आप का मन मित्रों व स्नेहीजनों के साथ खान-पान, सैर-सपाटे एवं प्रेम संबंधों की वजह से प्रफुल्लित रहेगा। यात्रा पर्यटन के योग हैं। करियरः  कार्यालय में आपके काम की प्रशंसा होगी।
आज आप के घर में सुखशांति और आनंद का माहौल रहेगा। आपका शारीरिक एवं मानसिक आरोग्य अच्छा रहेगा। रोमांसः स्त्री मित्रों से मुलाकात होगी। करियरः  धन जरूरी वस्तुओं पर ही खर्च होगा। प्रतिस्पर्धीयों तथा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।  धन लाभ होगा।
आज आपको यात्रा-प्रवास न करने की गणेशजी सलाह देते हैं। रोमांसः प्रणय संबंधों के लिए आज का दिन योग्य है। प्रियपात्र के साथ रोमांचक पल का आनंद ले पाएंगे। करियरः  आज साहित्य एवं कला में आपकी रुचि रहेगी और मन में कल्पना की तरंगे उठेंगी। चर्चाओं से दूर रहें।
आज आपकी मनःस्थिति और स्वास्थ्य कुछ अच्छे नहीं है। रोमांसः प्रेमी-प्रेमिका के बीच कुछ अनबन हो सकती है। क्रोध पर काबू रखें। करियरः  मानहानि होने की संभावना है।  मानसिक आवेग और प्रतिकूलताओं में वृद्धि से आपका दिन व्यग्रतापूर्ण बीतेगा।
मानसिक रुप से आज आप बहुत हल्कापन महसूस करेंगे। आपके मन पर छाए हुए चिंता के बादल हटने से आपके उत्साह में वृद्धि होगी। रोमांसः महिला मित्रों से मुलाकात होगी, कहीं घूमने का कार्यक्रम भी बन सकता है। करियरः  प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त होगी।
आज आप को व्यय पर संयम रखने की सलाह देते हैं। क्रोध  पर संयम रखें, अन्यथा इससे मानसिक दुख पहुंचने की संभावना है। रोमांसः जीवनसाथी का हर संभव सहयोग प्राप्त होगा। करियरः  कार्यालय परिसर में सहयोगियों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक लाभ होगा।

Friday, September 14, 2018

कोर्ट को कानून में इस तरह का बदलाव करने का

म इंडिया के कप्तान विराट कोहली और बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा को लेकर फैन्स के बीच खूब क्रेज रहता है। भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज खत्म होने के बाद लंदन से भारत के लिए रवाना हुई। इस दौरान विराट कोहली ने जो टी-शर्ट पहन रखी थी, वो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।
दरअसल विराट की इस सफेद टी-शर्ट पर रेड कलर का हार्ट बना है और उसके नीचे A लिखा है। इसके पहले एक बार अनुष्का को विराट के नाम और जर्सी नंबर की टी-शर्ट पहने हुए भी देखा गया है। विराट की ये टी-शर्ट देखने के बाद लोग अनुष्का शर्मा को लकी कह रहे हैं। भारत को इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 1-4 से हार का सामना करना पड़ा।
विराट फिलहाल अब क्रिकेट से ब्रेक पर होंगे और वो एशिया कप में टीम का हिस्सा नहीं हैं। विराट लंबे समय से लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं और भारतीय क्रिकेट टीम के आने वाले शेड्यूल को देखते हुए आराम दिया गया है।
हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने शुभकामनाएं दी। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि भाषा वह माध्यम है जिससे कोई भी समाज अपना ज्ञान, संस्कृति और संस्कार भावी पीढ़ियों तक पहुंचाता है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में लगे भाषाविदों और हिंदी प्रेमियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
हिन्दी दिवस के मौके पर कई कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया और उसके महत्व पर जोर देते हुए इसके मूल स्वरूप को बनाए रखने पर ध्यान खींचा गया।
भारतीय दंड संहिता (आपीसी) की धारा 498ए के तहत दहेज प्रताड़ना केस में सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी हो या नहीं ये तय करने का अधिकार पुलिस को वापस दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर राज्य के डीजीपी को इस मुद्दे पर पुलिस अफसरों व कर्मियों में जागरुकता फैलाएं और उन्हें बताया जाए कि सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर जो सिद्धान्त दिया है वो क्या है।

इसके साथ ही, गिरफ्तारी से पहले दहेज प्रताड़ना की जांच के लिए सिविल सोसायटी की कमेटी बनाने की गाइडलाइन को हटाया गया। लेकिन शीर्ष अदालत ने कहा कि पति और उसके रिश्तेदारों के सरंक्षण करने के लिए जमानत के रूप में अदालत के पास अधिकार मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट इस तरह आपराधिक मामले की जांच के लिए सिविल कमेटी नियुक्त नहीं कर सकता, इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के दो सदस्यीय बेंच के फैसले को संशोधित करते हुए तीन सदस्यी बेंच ने कहा कि इस तरह कोर्ट कानून की खामियों को नहीं भर सकता। ये कार्यपालिका द्वारा कानून लाकर ही करना संभव है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। सर्वोच्च अदालत ने दोहराया कि अगर दोनों पक्षों में समझौता होता है तो कानून के मुताबिक वो हाईकोर्ट जा सकते हैं। अगर पति पक्ष कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करता है तो केस की उसी दिन सुनवाई की जा सकती है।
इससे पहले, इसी साल अप्रैल माह में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 2017 में इस मामले में चली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने आदेश दिया था कि दहेज उत्पीड़न की शिकायतों पर तुरंत गिरफ्तारी न हो और ऐसे मामलों को देखने के लिए हर ज़िले में फैमिली वेलफेयर कमिटी बनाया जाए। साथ ही, उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई हो। दो जजों की बेंच के आदेश को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
याचिका दायर कर कहा गया कि कोर्ट को कानून में इस तरह का बदलाव करने का हक नहीं है। कानून का मकसद महिलाओं को इंसाफ दिलाना है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते देश भर में दहेज उत्पीड़न के मामलों में गिरफ्तारी बंद हो गई।ससे पहले, जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की दो जजों की बेंच ने महिलाओं के लिए बने कानूनों के दुरुपयोग के मामले को लेकर अहम निर्देश जारी किए थे। अपने आदेस में कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग की शिकायतों को देखते हुए ऐसे मामलों में तत्काल गिरफ़्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके अनुसार दहेज प्रताड़ना के मामलों में अब पति या ससुराल वालों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। दहेज प्रताड़ना यानी आईपीसी की धारा 498-ए के दुरुपयोग से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाते हुए इस सिलसिले में कुछ दिशा-निर्देश जारी भी किए थे।
दहेज कानून के दुरूपयोग के कई मामले आए सामने
एनसीआरबी के रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2009 के दौरान करीब 1 लाख 74 हजार लोगों की गिरफ्तारी 498ए के अंतर्गत हुई थी और इनमें 8,352 केस फर्जी साबित हुए। 2012 में 498ए के तहत केस दर्ज करने का रेट 93.6फीसदी रहा जबकि इसमें सिर्फ 14.3 फीसदी ही दोषी ठहराए गए थे।

Monday, September 10, 2018

होता था जब आपका अगला पैर ज़मी

"हमारी नज़र स्टेज की तरफ़ होती थी और हमें एकदम लय में क़दम आगे पीछे रखने होते थे. इसके साथ हमारे हाथ में मशालें होती थीं, वो भी एकदम सही लाइन में होनी चाहिए थीं."
इतनी परफेक्ट मार्च के लिए ही महीनों रिहर्सल कराई जाती थी.
"सबको पिछला पैर ठीक उस वक़्त उठाना होता था जब आपका अगला पैर ज़मीन पर पड़ गया हो. ये करना बहुत मुश्किल था. इसकी छह महीने तक रिहर्सल करते-करते लगों का वज़न कम से कम पांच किलो तक कम हो जाता था."
आयोजकों पर परफेक्शन का दबाव होता था. जिसका मार्च सबसे अच्छा होता था उसे मेडल मिलते थे और जिसका ख़राब हो जाता था उसे बुरी तरह डांटा जाता था. ही-चांग सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के सचिव थे. वो राजनीतिक कारणों के चलते चार साल पहले उत्तर कोरिया से भाग गए थे. उनका काम परेड के लिए देश के सबसे वफ़ादार परिवारों को चुनना होता था.
उस वक्त को याद करते हुए नो ही- चांग कहते हैं, "वो बहुत ही दर्दनाक अनुभव था. आम लोगों के साथ-साथ पार्टी के अधिकारियों को भी प्रताड़ना झेलनी होती थी, क्योंकि हमें परेड की शुरू से आख़िर तक सफलता की गारंटी देनी होती थी."
"मार्च के लिए सैन्य अकादमियों और प्रमुख सैन्य इकाइयों से भी लोगों को चुना जाता था. इसके अलावा गायकों, डांसरों और जिमनास्टों का भी चुनाव होता था. इन सब को चुनने का सिर्फ़ एक ही आधार था कि सब लोग किम परिवार के प्रति वफ़ादार हों."
नो बताते हैं, "हर व्यक्ति के बारे में पहले अच्छे से पता करना होता था. सबसे अहम ये देखना होता था कि उनके परिवार का क्या रिकॉर्ड रहा है. उनके परिवार का रिकॉर्ड साफ़-सुथरा होना ज़रूरी था, वो देश के प्रति वफ़ादार होने चाहिेए थे."
उत्तर कोरिया से भागे कई लोगों ने बताया कि उन्हें परेड के लिए कई महीनों तक रोज़ाना 10-10 घंटे की ट्रेनिंग कराई जाती थी.
कुछ लोग बीमार हो जाते थे, कुछ को चोटें आती थीं और किसी की हालत परेड में हिस्सा लेने लायक नहीं बचती थी, तो उसका रिप्लेसमेंट भी ढूंढ़ना होता था.
लेकिन वो नेता ये सब कैसे कर सकता है जिसने उत्तर कोरिया के लोगों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने का वादा किया हो? किम जोंग-उन उत्तर कोरिया को परमाणु संपन्न देश घोषित कर चुके हैं और कह चुके हैं कि उनका मक़सद देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाना है.
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने भी रविवार को होने वाली परेड को "जीत का जश्न और देश की अर्थव्यवस्था के तेज़ी से होते विकास को दर्शाने वाला" क़रार दिया है.
लेकिन माना जा रहा है कि स्थापना दिवस के ख़ास मौके पर किम जोंग-उन बड़ी और अहम घोषणा कर सकते हैं. कई विश्लेषकों का मानना है कि वो ऐसी उपलब्धि चाहते हैं जो उनके पिता और दादा भी हासिल नहीं कर पाए- वो कोरिया के युद्ध की समाप्ति की घोषणा करना चाहते हैं.
ये युद्ध एक सैन्य समझौते के बाद 1953 में ख़त्म हो गया था. लेकिन कभी कोई शांति समझौता नहीं हुआ. मरीका के साथ बातचीत अटकने के बाद किम जों-उन ने इस हफ्ते दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधिमंडल का अपने देश में स्वागत किया और कोरियाई प्रायद्वीप को "परमाणु-मुक्त कराने की अपनी प्रतिबद्धता" को दोहराया.
दक्षिण कोरिया के अधिकारियों के मुताबिक किम इस बात से परेशान है कि उनकी सकारात्मक कोशिशों पर दुनिया भरोसा नहीं कर रही है.
वो अमरीका के साथ रिश्ते बेहतर करने की इच्छा जता चुके हैं. वो जानते हैं कि ऐसा करने के लिए परमाणु निरस्त्रीकरण पहली शर्त है.
किम ट्रंप के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं, ट्रंप भी ट्वीट कर जवाब दे चुके हैं कि "वो साथ मिलकर ये करने को तैयार हैं."
हालांकि इन कोशिशों की राह में अब भी एक बड़ा रोड़ा है. किम जोंग-उन उत्तर कोरिया के अबतक के सबसे खुले विचारों के नेता तो दिखना चाहते हैं, लेकिन वो दुनिया को अब भी उत्तर कोरिया का एक सीमित रूप ही दिखाना चाहते हैं. और विदेशी मीडिया को परेड के लिए आमंत्रित करना एक ऐसा ही क़दम है.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक उत्तर कोरिया की क़रीब 40 फ़ीसदी यानी एक करोड़ से ज़्यादा आबादी को मानवीय सहायता की ज़रूरत है. देश के करीब 20 फ़ीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं.
कोरियाई प्रायद्वीप के लिए ये साल सबसे गर्म रहा. उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक इस साल "अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा" आई है.
रेड क्रॉस सोसायटी ने भी चेतावनी दी है कि चावल, मक्का और दूसरी फसलें सूख चुकी हैं, जिससे "भीषण खाद्य सुरक्षा संकट" का ख़तरा खड़ा हो गया है.
अगस्त में आंधी के साथ आई बाढ़ की चपेट में आने से कम से कम 76 लोगों की मौत हुई थी और क़रीब इतनी ही संख्या में लोग लापता हुए जबकि हज़ारों लोग बेघर हो गए थे.
ये उम्मीद कम ही है कि विदेशी मीडिया को तबाही का ये मंज़र दिखाया जाएगा. बल्कि किम और ट्रंप की हाल ही में हुई हाई-प्रोफाइन समिट के बावजूद मीडिया पर कड़ा नियंत्रण रखा जाएगा.
नो ही-चांग याद करते हैं कि भीषण गर्मी में मार्च कराई जाती थी और लोग लगभग भूखे पेट मार्च करते थे.
"ओह वो भूख. भूखा रहना सबसे बड़ी बात थी. ख़ासकर किम जोंग-इल के ज़माने में तो खाना बहुत ही कम था. सभी एक लाख लोग सुबह से रात तक काम करते थे. उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी दो वक़्त की रोटी मिल पाना था."
फिर भी जब नो ही-चांग से पूछा गया कि एक मैनेजर के तौर पर क्या वो परेड में शामिल उन लोगों से माफ़ी मांगने चाहेंगे. तो उन्होंने बड़े ही सख़्त लहज़े में ना कह दिया.उत्तर कोरिया में हमें सिखाया जाता था कि अगर दीवार हिलती है तो पहाड़ को भी हिलना ही होगा. इसका मतलब कि अगर किम इल-सुंग या किम जोंग-इल 'आह' कहते हैं तो हर नागरिक को 'आह' कहना है. वहां लोगों को सिर्फ़ "जी सर" कहना आता है. वहां सिस्टम इसी तरह काम करता है."
इस वफ़ादारी और गर्व की भावना को ही परेड और देश की सफलता की वजह समझा जाता है. किम जी-योंग याद करते हैं कि जब उनके दोस्त और सैनिक अपने नेता के सामने से गुज़रते थे तो ज़ोर से "लॉन्ग लिव" का नारा लगाते थे.
"उन्हें ये इतनी तेज़ चिल्लाकर बोलना होता था कि 100 मीटर लंबी मार्च के आख़िर तक ये आवाज़ पहुंचे. हमने उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन अब वो अपनी आवाज़ खो चुके हैं."
एक दर्शक होने के नाते किम कहते हैं कि ऐसे देश में सर्वाइव करने के लिए भी तो यही एक तरीका है.
"हम सब पार्टी के बड़े-छोटे अधिकारियों के बच्चे थे. अगर हम में से कोई शिकायत कर देता तो उसे ग़ायब कर दिया जाता था. इसलिए वहां कोई शिकायत नहीं करता."
"विदेशियों को ये परेड खूब पसंद आएगी, लेकिन मैं उन्हें बताया चाहता हूं कि परेड में शामिल होने वाले वो लोग बिना कुछ खाए छह महीने तक मेहनत करते रहे हैं. उन्होंने छह महीने तक इतना पसीना क्यों बहाया - सिर्फ़ 10 मिनट की मार्च के लिए? ये दिल को तोड़ने वाला है. मैं चाहता हूं लोग ख़ासकर पत्रकार उत्तर कोरिया के उस रूप को देखें जो कहीं दबा-छिपा है."
लेकिन इतनी मुसीबतें झेलने के बाद भी लोगों के मन में देशभक्ति की भवना है.
नो कहते हैं कि अगर उन्हें मौका मिलेगा तो वो उत्तर कोरिया लौटना चाहेंगे.
"100% मैं वापस जाऊंगा. अपने शहर के बारे में सोचकर मुझे रोना आता है. बिल्कुल, मैं खुशी से वापस जाना चाहूंगा. मैं हमेशा से प्योंगयांग वापस जाना चाहता हूं. कौन अपने वतन वापस नहीं लौटना चाहेगा?"

Tuesday, September 4, 2018

气候峰会:德班继续僵持

候变化会场外活动人员努力唱歌跳舞,希望推动政府达成全球协议抗击全球变暖
周四,尽管重要参会者——美国、欧盟和“基础四国”即中国、印度、巴西和南非之间已进行多次三边会议,但寻求应对气候变化全球协定的努力仍处于僵持状态。此时,距南非德班举行的联合国气候峰会闭幕还剩一天时间。印度环境部长贾彦什•纳塔拉简表示,前天她就已经“不再像以前那么乐观”。她也将返程机票从周六改到了周日。
 
今年“联合国气候变化框架公约”会议上的问题是,以“基础四国”为首的发展中国家希望富裕国家在2012年以后继续按现行《京都议定书》的规定进行温室气体( )减排,而发达国家则提出条件——新兴经济体国家也签订具有法律效力的协议来执行减排。“大家讨论的焦点是如何达成一致。对此,我没什么信心”,纳塔拉简女士说。“关键问题很明确。这也是我们忧心忡忡之处。”
 
周三美国、欧盟和“基础四国”之间的三方会谈进行了5个小时,截止周四下午又进行了2个小时。但是,对于这个困扰气候峰会多年的关键问题,依然没有任何解决方案。纳塔拉简女士说,她也见过来自77国集团的其他发展中国家代表,“他们和我们的立场一样”。尽管她承认,小岛国家联盟( )要求重要与会国采取其不愿接受的更为直接的行动。
 
来自“基础四国”的四位部长每天会面了三、四次。周四早上,他们一起去见了大会主席南非外交部长恩科阿纳-玛莎巴尼。“我们也告诉了她我们的观点,她表示会认真考虑,” 纳塔拉简女士说。
 
印度和其他发展中国家始终坚持,富裕国家应该按《京都议定书》第二个承诺期履行承诺。《京都议定书》是温室气体减排方面唯一具有法律效力的协议,第一个承诺期在2012年结束。美国没有签订此协议,其他富裕国家始终在抵制这一协议。现在,纳塔拉简女士说,“欧盟愿意履行它的第二个承诺期,但是非常希望制定一个路线图”,将新兴经济体也框入有法律效力的承诺中。“过去我们很明确。现在我们需要知道这个路线图的内容和时间安排。过去,我们都愿等看到IPCC评估报告再作决定。”下一次政府间气候变化小组( )评估报告将于2013年发布,随后2013至2015年间为审查期。
 
在周四的会议上,与会的美国代表团团长托德•斯特恩非常愤怒,因为很多人认为美国阻碍了达成协议的进程,而全球变暖已经在影响世界农业产出,使洪水、风暴和干旱更加频繁和严重,并导致海平面的上升。通过三方会谈,有一点已经明朗:美国与欧盟在具有法律效力协议的等级方面存在差别——欧盟认为,发展中国家可以少减排一些,因为现在几乎大气中所有多余的温室气体都是富裕国家排放的;但美国则坚持“完全对等”的减排标准。当问及此问题时,纳塔拉简女士说,“对此我们并不担心。我们已经重申过我们的议程。”
 
但是,观察者可以感觉出,只要富裕国家愿意为绿色气候基金注资,德班会议仍然可能会有一些成果。其中,绿色气候基金是为帮助贫困国家应对气候变化影响而成立的组织。但是,就像纳塔拉简女士所说,这是“一项艰巨的任务”,这就是为什么她“不再”那么乐观的原因。