Thursday, February 7, 2019

पाकिस्तान की कट्टरपंथी सियासी जमात तहरीक-ए-लबैक के नेता खादिम हुसैन रिज़वी

कुछ साल पहले तक रिज़वी एक छोटी सी मस्जिद में मौलवी हुआ करते थे. वे सरकारी कर्मचारी थे और लगभ नामालूम सी शख़्सियत फिर भी वे अपने विवादास्पद धार्मिक भाषणों के लिए जाने जाते थे.
धार्मिक उपदेश देते वक्त रिज़वी आम तौर पर सलमान तासीर की हत्या को प्रशंसात्मक लहजे से बताते रहे हैं.
तासीर उन राजनेताओं में एक थे, जो सार्वजनिक तौर पर आसिया बीबी से सहानुभूति रखते थे और ईशनिंदा क़ानून में बदलाव की वकालत करते थे.
पंजाब के गवर्नर के तौर पर तासीर ने साल 2010 में आसिया बीबी से मुलाकात के लिए शेखुपुरा जेल का दौरा किया था. नक़ाब पहने आसिया के साथ उनकी जो प्रेंस कॉन्फ्रेंस आई थी, उसमें तासीर ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति से आसिया को माफ़ी दिए जाने की अपील की थी.
कुछ ही हफ़्ते बाद जनवरी की एक सर्द सुबह तासीर की हत्या उनके अपने ही बॉडीगार्ड ने कर दी. इस्लामाबाद के व्यस्त खोसार बाज़ार के बीचोंबीच 26 साल के पुलिस कमांडो मलिक मुमताज़ हुसैन क़ादरी ने गवर्नर तासीर को प्वॉइंट ब्लैंक रेंज से 27 गोलियां दागीं थीं.
इसके बाद क़ादरी रातों रात लाखों लोगों के लिए हीरो बन गए थे. उन्होंने खुद कोअधिकारियों के सामने पेश करते हुए कहा था, "मुझे तासीर की हत्या करने पर कोई पछतावा नहीं है, ये मेरी धार्मिक ड्यूटी थी."
उन्होंने पुलिस अधिकारियों को कहा था, "ईशनिंदा करने वालों की सज़ा तो मौत ही हो सकती है."
सुरक्षा कारणों के चलते कुछ दिनों की देरी के बाद जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तब क़ादरी का सैकड़ों समर्थकों ने उत्साह बढ़ाया था और उन पर गुलाब बरसाए थे.
लेकिन क़ादरी को मौत की सज़ा मिली और साल 2016 में उन्हें फांसी दे दी गई.
रिज़वी को क़ादरी की तारीफ़ करने और उन्हें शहीद बताने के चलते मौलवी की नौकरी से निकाल दिया गया. वे राजनीति में आ गए और उन्होंने अपने राजनीतिक दल टीएलपी की स्थापना की.
पार्टी के गठन के कुछ ही महीनों के अंदर, उनके कार्यकर्ताओं ने मुख्य हाइवे को बंद कर दिया. इसके चलते राजधानी इस्लामाबाद 20 दिनों तक प्रभावित रहा.
रिज़वी ने उस वक्त सरकार पर ही ईशनिंदा का आरोप लगाया था. इसकी वजह ये थी कि चुनावी शपथ के संशोधित संस्करण में पैगंबर मोहम्मद को अंतिम सत्य बताने वाला रिफ़्रेंस शामिल नहीं किया गया था.
इसके बाद बीते साल हुए चुनाव में रिज़वी ने खुद को पैगंबर मोहम्मद के सम्मान का रक्षक बताया, जिसके आधार पर उनकी छोटी सी राजनीतिक पार्टी को 20 लाख से ज़्यादा मत मिले. पूरे अभियान के दौरान इनके पोस्टर और बैनरों पर क़ादरी को शहीद बताने वाली तस्वीरें लगी हुई थीं.
बहरहाल तीन दिनों तक पाकिस्तान में चले टीएलपी के विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने सुलह का रास्ता बनाया.
सरकार इस बात पर तैयार हुई कि आसिया की रिहाई को बदलने वाली याचिका का विरोध नहीं करेगी और आसिया के देश छोड़ने पर पाबंदी लगाएगी.
याचिका दाखिल होने के बाद भीड़ हटी, आसिया को जेल से रिहा किया गया लेकिन सुरक्षा के लिहाज से उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया.
आख़िरकार आसिया को रिहा होने के लिए तीन महीने का इंतज़ार करना पड़ा.
पाकिस्तान में बीते 30 साल से पैगंबर मोहम्मद की निंदा करने पर मौत की सज़ा काप्रावधान है लेकिन ईशनिंदा के चलते अभी तक किसी को मौत की सज़ा नहीं दी गई है.
पाकिस्तान के सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के मुताबिक़ अब तक पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़निंदा वाले या फिर कुरान की बेअदबी जैसे गंभीर आरोपों वाले ईशनिंदा के 1549 मामले सामनेदर्ज़ किए गए हैं.
इनमें से 75 अभियुक्तों की हत्या सुनवाई शुरू होने से पहलेकर दी गई. कई अभियुक्तों की मौत पुलिस हिरासत में हुई, कुछ को भीड़ ने मार डाला.

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