国领导人本周在纽约举行会晤,希望打破气候变化问题的政治僵局,为即将于2015年召开的巴黎气候大会造势。将全球平均温度上升幅度控制在与工业革命之前相比不超过2℃这一目标,已经是全球领导人的共识。但是当前的气候政策还不足以实现该目标。
我们本周发表的一项研究揭示了一个新的动态发展趋势——即在快速大规模的经济发展背景之下,全球碳排放量版图因中国而改变。
目前,中国的二氧化碳排放量几乎占全球二氧化碳排放总量的三分之一(30%),比美国和欧盟的总和还多。2013年,中国人均二氧化碳排放量超过欧洲,比全球人均排放值高45%。
2013年,全球化石燃料燃烧和水泥生产排放的二氧化碳较前一年增长了2.3%,预计到2014年还将上涨2.5%。若将森林砍伐考虑在内,2014年全球二氧化碳排放量可能超过400亿吨。尽管过去25年中举行了多次气候磋商,如今的温室气体排放量却几乎比1990年时高出65%。
中国的温室气体排放占2013年全球新增排放量的50%以上,在过去十年全球新增排放量中的占比达到60%以上。
不论人们如何解读数据,想要将全球平均温度上升控制在2℃以内,中国才是关键。尽管中国投入巨资发展可再生能源技术,全力引入排放交易体系,出台各项措施解决大气污染,但温室气体排放量依然继续上升;若想将全球平均温度上升限制在2℃以内,中国的排放量必须达到峰值并快速回落。
煤炭在中国能源消费结构中仍占有最大比重。2013年中国温室气体排放量比前一年增长了4.2%;但低于过去十年7.1%的年平均排放增长率,这得益于近年中国经济活动放缓。
我们的碳预算数据显示,中国在碳排放地缘政治中的地位已经改变。中国若能坚定不移地采取强有力的减排行动,这将向全世界发出有力的信号,全球平均温度上升控制在2℃以内的目标也是可以实现的;到那时,不论是发达国家,还是发展中国家就都没有理由再裹足不前了。
戈兰•彼得斯,挪威奥斯陆国际气候和环境研究中心()高级研究员,《2014年全球碳预算》作者,全球碳计划科学指导委员会成员。与哥本哈根会议前相比,世界各国在发展低碳经济方面积累了更多的经验。例如,5年前,可再生能源的开发利用还停留在可行性研究阶段。如今,这一情况发生了根本性的转变,可再生资源的开发利用发展迅速。目前,太阳能制造成本已经下跌了80%,风电价格也达到历史最低水平。中国为2015年、2017年和2020年的可再生能源发展制定了雄心勃勃地目标。同时,越来越多的美国公用事业公司发现,利用风能和太阳能是扩大发电能力最经济的方式。将近100多个发展中国家已经制定并实施了可再生能源政策。与此同时,约有40个国家政府和20多个地方级政府制定了碳排放价格,控制污染。
能源格局正在转变,低碳经济带来了明显的经济和社会效益。这表明,国家、企业和个人在制定政策,加快替代化石燃料方面获得了越来越多的经验和支持。这些变化,与经济复苏(与哥本哈根会议前摇摇欲坠的经济相比)一道促进了各国政府采取比之前相比更加雄心勃勃的气候行动。
此外,新型合作伙伴关系和新的观点也改变着气候变化的政治格局。包括智利、印尼、越南和哥斯达黎加在内的一些中等收入国家也站出来呼吁走全新的低碳发展之路。这些新角色将在巴黎气候会谈(即将于2015年12月举行)之前的谈判中发挥主导作用。
白韫雯——北京创绿中心气候与政策研究员
2009年以来,我感到双边合作明显增多。之前各个国家大都在联合国气候变化框架公约和京都议定书下履责,而在哥本哈根之后双边合作明显增多,如中美气候变化联合声明、中英气候变化联合声明,中俄联合声明中也同样涉及到“双方坚定遵循《联合国气候变化框架公约》的原则和宗旨,愿为加强国际合作、共同应对全球气候变化挑战作出贡献”。
在2008年之前欧盟具有谈判的动力,而往后中美欧都开始承担相应的责任。主要体现在美国从在京都议定书中的被动局面开始逐渐发力,中国也开始重视气候谈判。
责任的区分也开始细化,新兴经济体如中国、印度、巴西被从发展中国家中区别开来,按照其经济体量、温室气体排放量等承担义务。
王彬彬——乐施会气候变化与减贫团队经理
2009年哥本哈根气候大会强调(气候变化)减缓,气候变化适应的问题没有得到足够重视。中国政府缺乏经验,只是被动且没有意识的接受减缓,忽视了气候变化对贫困人口的影响。
2011年德班气候大会时,减缓和适应被提出应摆在同等重要的位置。中国政府也把适应问题作为国家战略考虑。
但是适应存在难以量化的困难,到目前为止技术层面如何进行仍然不是很清晰。
在资金问题上,尽管发达国家就各自提供资金始终语焉不详,设立的绿色气候基金至今还是空头支票,但发展中国家开始将关注点从发达国家提供的资金数量转移到如何获得_更多资金来源,以及资金如何进行管理、分配和落实上。中国同样在推进适应基金的工作。
蒋南青,联合国环境规划署中国办公室
从哥本哈根之后,欧盟就已经制定了严格的目标,并且在减排工作上表现积极。中国政府一方面会受到欧盟等国际社会的压力,另一方面国内的环境问题也迫切需要开始采取行动。在共同但有区别的责任原则下,可以看到中国政府正在将气候谈判的目标分解细化,从建设部、工信部,到交通业,各个行业都开始根据这一宏观目标制定相应任务,比如建立碳交易市场。由此可以看出在09年谈判后,中国政府已经开始逐渐采取实际行动,承担自己的责任义务。
法特玛·拉贾巴利,发展研究所
哥本哈根会议后,非洲具有实证依据的气候变化政策和行动获得了很大的进展,新的区域联盟、倡议以及学习活动层出不穷。但农业发展面临的挑战日益清晰:
政府间气候变化专门委员会(IPCC)发布的最新报告着重阐述了气候变化是如何影响农业生产和粮食安全,并进一步加剧了本就堪忧的全球饥饿和营养不良状况。
非洲有占劳动力总数65%的人口从事农业生产,农业生产总值占GDP总量的30-40%。令人不安的是,目前整个非洲还未就如何应对气候变化的影响达成一致协议。
即将成立的全球气候智能型农业联盟、以及近期召开的首届聚焦农业发展的美非峰会和以“非洲自给自足的时刻已经到来”为主题的气候发展大会都推动了非洲地区应对气候变化的进程。非洲政府仍需要仔细思考如何尽可能地确保这一进程取得成效。
首先,包括东部和南部非洲共同市场( )
和非洲发展新伙伴计划( )在内的非洲区域性机构需要对“气候智能型农业”的理解达成共识——即气候智能型农业旨在提高粮食产业安全和抵御灾害的能力,同时减少温室气体排放。鉴于农业发展面临的挑战涉及到多个部门,跨境影响也在逐渐增加,因此,各国之间以及国内各部门之间还应展开密切合作。目前应该尽可能地让决策者获得有关气候智能型农业的现有证据,同时还需要仔细分析气候智能型农业对整个社会(包括公共卫生和营养、以及贸易和技术等方面)的影响。
相比于各国领导人出席某一峰会,人类不断适应气候变化的进程更加重要。非洲各国政府和区域机构必须行动起来,共同应对气候变化。
希娜·洛提亚,国际环境与发展学院(LEAD)巴基斯坦项目
在我看来,过去几年,谈判进行得很艰难,温室气体排放国也曾承诺提供大量资金和专业技术支持减排。然而,一要落实到实际行动中时,根深蒂固的政治经济便开始占据主导,一切承诺就自然而然地被抛之脑后了。
除了官方发展援助外,发达国家承诺在2010-2012年间向易受灾国家,尤其是最不发达国家,提供300亿美元的资金支持。发达国家还承诺到2020年之前,每年向包括巴基斯坦在内的发展中国家提供1000亿美元的长期气候融资。这笔资金能否落实还是个未知数,而且款项支出机制的透明度也存在问题。
巴基斯坦温室气体排放量较低,它可能并不关注这些问题。但是我发现,这些年来,由于许多新兴经济体选择加入美国的行列,《京都议定书》(KP)的影响力大大下降。美国一直以来坚决拒绝签署《京都议定书》,并拒绝承诺减少温室气体的排放。
虽然这些年来,有关“适应气候变化”的对话一直不断,但是目前,“损失与破坏”成为人们关注的另一焦点,这对巴基斯坦来说意义重大。试想,假如各国采取了适应性措施,但是由于气候变化缓慢,这些国家还是要继续遭受海水入侵和荒漠化等灾害的影响,会发生什么?我们知道如何评估和计算由此造成的损失吗?
Thursday, August 30, 2018
Tuesday, August 28, 2018
होटल विवाद मामले में मेजर गोगोई दोषी क़रार, होगी कार्रवाई
भारतीय सेना की कोर्ट ऑफ़ इन्क्वॉयरी (CoI) में मेजर लीतुल गोगोई के ख़िलाफ़ होटल विवाद मामले में दोषी पाया
गया है और उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया गया है.
अदालत
ने पहली नज़र में मेजर गोगोई को स्थानीय लोगों के साथ 'सेना के निर्देशों
के ख़िलाफ़ जाकर मेलजोल और अनौपचारिक सम्बन्ध रखने और ड्यूटी की जगह से दूर
रहने' का दोषी पाया है.समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कोर्ट ऑफ़ इन्क्वॉयरी सेना के ही एक ब्रिगेडियर ने की है.
ये सारा विवाद तब शुरू हुआ जब मेजर गोगोई ने इस साल मई में एक स्थानीय युवक और 18 साल की एक लड़की के साथ श्रीनगर के एक होटल रूम में जाने की कोशिश की.
होटल स्टाफ़ ने लड़की को कमरे में जाने की इजाज़त नहीं दी, जिसकी वजह से स्टाफ़ के सदस्यों और कुछ स्थानीय लोगों से उनका झगड़ा हुआ था.
इसके बाद पुलिस ने मेजर गोगोई को हिरासत में ले लिया था.
विवाद बढ़ने और मामला मीडिया में आने के बाद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि अगर मेजर गोगोई दोषी पाए गए तो उन्हें ऐसी सज़ा मिलेगी जो मिसाल बनेगी.
अब कॉर्प्स कमांडर को बाद कोर्ट ऑफ़ इन्क्वॉयरी के फ़ैसले को मंजूरी देनी होगी, जिसके बाद आर्मी ऐक्ट की प्रासंगिक धारा के तहत मेजर गोगोई पर आरोप तय किए जाएंगे.
फिर ये फ़ैसला होगा कि उन्हें सज़ा दी जाएगी या उनका कोर्ट मार्शल किया जाएगा.
मेजर गोगोई पिछले साल तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने बडगाम में एक शख़्स को मानव ढाल के रूप में सेना की जीप से बांध दिया था.
इसके बाद उन्हें सेना ने पुरस्कार भी दिया था. इस पूरे मामले पर काफ़ी विवाद हुआ था और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली.
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले में भारतीय सेना की 53वीं राष्ट्रीय रायफल्स के ख़िलाफ एफ़आईआर भी दर्ज की थी.
पिछले हफ़्ते दो अभूतपूर्व घटनाएँ
हुईं जिन्हें आप चाहें तो 'मामूली बात' कहकर ख़ारिज कर सकते हैं, या फिर
अगर बारीकी से देखें तो ये घटनाएँ आपको चिंतित कर सकती हैं.
हाल ही
में पटना हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए जस्टिस मुकेश रसिक
भाई शाह ने बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री की तारीफ़
में कहा कि "नरेंद्र मोदी एक मॉडल हैं, वो एक हीरो हैं.दूसरी घटना छत्तीसगढ़ की है जहाँ राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की तस्वीरों वाली बड़ी बड़ी होर्डिंग्स रायपुर शहर में लगा दीं जिनमें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पहली बार छत्तीसगढ़ आने के लिए उनका स्वागत किया गया था.
हालाँकि, रिपोर्टों के मुताबिक़
भारत के किसी भी नागरिक को, चाहे वो न्यायाधीश ही क्यों न हो, किसी की तारीफ़ या आलोचना करने का संवैधानिक अधिकार है.
देश के नागरिक और वोटर की हैसियत से जज़ भी किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के काम या विचारधारा से सहमत होकर उसे वोट देते हैं.
बाद में इनमें से कुछ होर्डिंग्स को उतार दिया गया था.
सतही तौर पर देखें तो दोनों घटनाएँ बेहद मामूली नज़र आएँगी.
जज होने के कारण उनका ये जनतांत्रिक अधिकार कम नहीं हो जाता.
लेकिन जब कोई जज न्याय की कुर्सी पर बैठा होता है तो कई बार उसे नागरिक के तौर पर अपनी पसंद के नेता, राजनीतिक पार्टी यहाँ तक कि सरकार के ख़िलाफ़ भी फ़ैसला करना पड़ सकता है.
इसीलिए हमारी शासकीय प्रणाली में न्यायपालिका को सरकारों से आज़ाद रखा गया है.
न्यायपालिका को सरकार का अंग इसीलिए नहीं माना जाता कि वो सरकार और उसके मुखिया के ख़िलाफ़ भी फ़ैसले करती है.
जनता की नज़रों में न्याय करने वाला सत्ता से ऊपर भले ही न हो पर आज़ाद ज़रूर होना चाहिए.
तभी न्याय की व्यवस्था में जनता का भरोसा बना रह सकता है.
जब तक ये भरोसा बना रहता है तब तक जनता न्याय की तलाश में पुलिस-प्रशासन और नौकरशाही के ज़रिए अदालत तक जाती है.
जहाँ ये भरोसा दरकने लगता है लोग अपने अपने तरीक़े और नज़रिए से ख़ुद ही "न्याय" करने लग जाते हैं.
दुनिया के कई देशों में इसी तरह से अराजकता फैली है और वहाँ अदालतें नहीं बल्कि विजिलांती संगठन, मिलिशिया और अपराधियों के गिरोह फ़ैसला करते हैं.
ज़्यादातर मामलों में दुश्मन के ख़िलाफ़ ये फ़ैसले सड़क पर ही किए जाते हैं.
ये बात जस्टिस मुकेश रसिक भाई शाह ही बेहतर जानते हैं कि जब वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "हीरो और मॉडल" बता रहे थे तो क्या ये उन्होंने ये राय एक आम नागरिक की हैसियत से दी थी या पटना हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस के तौर पर.
और क्या उनकी राय में मोदी उनके अपने मॉडल और हीरो हैं या वो ये बात पूरे देश के लोगों की ओर से कह रहे थे?
जस्टिस शाह चाहते तो कह सकते थे कि लोगों की राय पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है और सबको अपनी बात कहने का हक़ है.
लेकिन उन्होंने जवाब में मोदी के बारे में अपनी राय स्पष्ट शब्दों में प्रकट की और कहा, "क्योंकि नरेंद्र मोदी एक मॉडल हैं, वो एक हीरो हैं."
सरकारें क्यों नहीं चाहेंगी कि न्यायाधीश उनकी तरफ़दारी करें? सरकारें और सत्तारूढ़ पार्टियाँ क्यों नहीं चाहेंगी कि क़ानून के हाथ जब उनके किसी बड़े नेता तक पहुँचने वाले हों तभी कोई अदृश्य शक्ति इस हाथ को पीछे खींच ले?
सरकारें क्यों नहीं चाहेंगी कि उनके हर सफ़ेद-सियाह पर अदालतें अपनी मुहर लगाएँ ताकि उनको सबकुछ करने की छूट मिल जाए, जैसा कि इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गाँधी ने चाहा और करवाया?
सरकारें क्यों नहीं चाहेंगी कि देश के हर नागरिक की आँखों की पुतलियों की तस्वीरें, अँगुलियों के निशान, फ़ोन नंबर, बैंक खाते, मकान-दुकान, पत्नी-बच्चे, माता-पिता, चाचा-ताऊ-बिरादर और रिश्तेदारों की सब जानकारियाँ उसकी मुट्ठी में हो?
सरकारें ज़रूर जानना चाहेंगी कि आप क्या खाते हैं, कहाँ जाते हैं, किससे मिलते हैं, कौन से कपड़े पहनना पसंद करते हैं, इंटरनेट पर कितना समय और क्या देखने में बिताते हैं, किस पार्टी को अच्छा और किसे बुरा समझते हैं, ट्रेड यूनियन को नेतागिरी मानकर ख़ारिज करते हैं या इसे कामगारों का बुनियादी अधिकार मानते हैं.
सरकारों की ऐसी ही कई असंवैधानिक मनमानियों पर अंकुश लगाने का काम न्यायाधीशों का है. पर अगर न्यायाधीश सरकार चलाने वालों को "हीरो और मॉडल" कहने लगे तो इसे उनकी सहानुभूतियों के संकेत की तरह देखा जा सकता है और न्याय की कुरसी पर बैठे व्यक्ति के बारे में इस आधार पर ग़लत-सही धारणाएँ बना ली जा सकती हैं.
"
Friday, August 17, 2018
世界大象日:环保组织呼吁禁止国内合法象牙市场
月21日,英国首相与法国总统弗朗索瓦·奥朗德在巴黎共进晚餐。就在同一天,法国电力公司(EDF)宣布将于7月28日举行董事会议。新闻通稿显示,辛克立角新建核电项目将出现在本次会议议程中。
其实这个项目多年以来一直都在法国电力公司(EDF)董事会的讨论议程之上,所以消息一出也并未引起太大波澜。然而,英法双方后续的媒体简报均显示,法国电力公司(EDF)将在本次会议上就是否继续推进辛克立项目做出最后决定。这一消息着实让人感到意外,因为此前的信息一直显示,最终决定应该是在今年9月出台。
在7月26日召开的股东特别大会上,法国电力公司(EDF)股东一致同意进行一项40亿欧元(约合297亿元人民币)的资本重组计划。本次会议也为两天后法国电力公司(EDF)在召开的董事会上正式公布最终投资决定( )扫清了道路。
与此同时,7月29日,投资协议签署准备工作也在伦敦陆续展开。协议一旦签订,英国政府就背上了枷锁,不得不履行自己在协议中的义务,不仅要承诺未来35年为电力用户提供370亿英镑的补贴,同时协议还要求英国政府未来不得就辛克立项目改变立场。
而一场盛大的庆祝午餐会也在辛克立的一座帐篷中拉开了帷幕。来自法国、中国和英国的嘉宾受邀前往。按照计划,这些嘉宾还将共同参与一场规模盛大的媒体采访活动。7月28日下午6点30分,法国电力公司( )准时宣布完成最终投资决定( )。
而就在当晚8点,意外状况再次出现。英国商业、能源与工业策略大臣格雷格·卡拉克在一份声明中表示:“英国政府将全面审慎考虑辛克立项目,并将于今秋早些时候做出最终决定。”
后续简讯坚称,最后一刻戳破这个精心吹起的泡沫的正是英国首相本人。这一消息不仅令参与该大型合资项目的英国的合作伙伴深感震惊,也在私人资本领域引起众怒。由此带来的政治破坏作用可想而知。
受影响最严重的当属英国与中法两国政府的关系。目前保持与上述两国的亲密关系至关重要,而英国的做法无疑是当众让中法两国下不来台。英国首相希望英国退欧不会影响英国经济前景而采取的策略如今也深受怀疑。因为辛克立核电站恰恰是英国表明自己仍然深得外国投资者信心的标志性项目。
而英国首相本人稳健的个人风格也因此遭受一击。无论是执政的保守党,还是在野的工党,双方似乎都在争着抢着看谁制造的“混乱”更多。面对这样的状况,政府官员拿出准备好的解释和说辞来安抚各方。按照某些公务人员的说法:“根本不用担心,只不过是要理顺一些细节问题而已,新官上任三把火嘛!”
这套说辞的可信度并没有持续太久。周末有报道指出,特丽莎·梅其实早在上周的晚宴上就针对自己的忧虑警告过奥朗德,并且还在法国电力公司( )董事会会议召开前的周三与奥朗德通过一次电话,并且在电话中再次强调了自己的担忧。
如果真是这样,那么这些警告恐怕看起来就有些不明确了。因为至少奥朗德办公室方面认为这些警告没有严重到需要提醒法国电力公司( )的程度。法国电力公司( )的过往记录显示,他们一直在最终投资决定( )上回避这一问题,所以这样的状况再出现一次也不足为奇。这样的结果的确看起来有些令人尴尬,但还不至于造成破坏性影响。
目前辛克立项目面临的问题只会越来越大。关于该项目可行性的质疑层出不穷。法国电力公司(EDF)董事会在这项决议上产生分歧;数位高层经理辞职;联盟开始采取法律措施;评级机构也威胁将会继续下调该公司的信用等级。而在英国,无论是议会、公众、媒体还是其他官方机构,大家的观点都变得更加质疑。B计划出台势在必行。
英国首相为何在如此短的时间内做出这样一个戏剧性的、政治代价高昂的决定?弄懂这一问题一点儿也不比预测九月份之前局势的变化要容易。关于这个项目的争论已经上演过多次。所以到底还要审查些什么呢?其实,在格雷格·卡拉克的声明中我们也许能找到一些端倪。
声明中提到了这样一个模棱两可的说法——要审慎考虑“该项目的所有组成部分”。据悉,本次交易的一个组成部分就是中国为辛克立项目建设提供资金援助,同时允许其在艾克萨斯的布拉德威尔建立一个自己的核反应堆。接受中国的资金是一回事儿,而让一个与中国军方有密切联系的中国企业对英国的电网软件有充分了解,甚至将其反应堆链接到这个电网之上可就是另外一回事儿了。
其实早在一年前,英国首相办公室主任就曾公开对中国参与辛克立核电项目表达过保留意见。如果这些保留意见理由够充分,而且被英国首相采纳,那么这可能就是特丽莎希望进一步审查的方面。如果真是这样,要想在回答这些问题的同时还能继续让中国投资,恐怕的确要有些政治手腕才行。
即便原定上周五举行的文件签署和庆祝仪式继续举行,辛克立项目建设真正开始前,新的反应堆还面临着不小的阻碍。而上周英国首相的突然决定无疑为项目再添一份阴云。
其实这个项目多年以来一直都在法国电力公司(EDF)董事会的讨论议程之上,所以消息一出也并未引起太大波澜。然而,英法双方后续的媒体简报均显示,法国电力公司(EDF)将在本次会议上就是否继续推进辛克立项目做出最后决定。这一消息着实让人感到意外,因为此前的信息一直显示,最终决定应该是在今年9月出台。
在7月26日召开的股东特别大会上,法国电力公司(EDF)股东一致同意进行一项40亿欧元(约合297亿元人民币)的资本重组计划。本次会议也为两天后法国电力公司(EDF)在召开的董事会上正式公布最终投资决定( )扫清了道路。
与此同时,7月29日,投资协议签署准备工作也在伦敦陆续展开。协议一旦签订,英国政府就背上了枷锁,不得不履行自己在协议中的义务,不仅要承诺未来35年为电力用户提供370亿英镑的补贴,同时协议还要求英国政府未来不得就辛克立项目改变立场。
而一场盛大的庆祝午餐会也在辛克立的一座帐篷中拉开了帷幕。来自法国、中国和英国的嘉宾受邀前往。按照计划,这些嘉宾还将共同参与一场规模盛大的媒体采访活动。7月28日下午6点30分,法国电力公司( )准时宣布完成最终投资决定( )。
而就在当晚8点,意外状况再次出现。英国商业、能源与工业策略大臣格雷格·卡拉克在一份声明中表示:“英国政府将全面审慎考虑辛克立项目,并将于今秋早些时候做出最终决定。”
后续简讯坚称,最后一刻戳破这个精心吹起的泡沫的正是英国首相本人。这一消息不仅令参与该大型合资项目的英国的合作伙伴深感震惊,也在私人资本领域引起众怒。由此带来的政治破坏作用可想而知。
受影响最严重的当属英国与中法两国政府的关系。目前保持与上述两国的亲密关系至关重要,而英国的做法无疑是当众让中法两国下不来台。英国首相希望英国退欧不会影响英国经济前景而采取的策略如今也深受怀疑。因为辛克立核电站恰恰是英国表明自己仍然深得外国投资者信心的标志性项目。
而英国首相本人稳健的个人风格也因此遭受一击。无论是执政的保守党,还是在野的工党,双方似乎都在争着抢着看谁制造的“混乱”更多。面对这样的状况,政府官员拿出准备好的解释和说辞来安抚各方。按照某些公务人员的说法:“根本不用担心,只不过是要理顺一些细节问题而已,新官上任三把火嘛!”
这套说辞的可信度并没有持续太久。周末有报道指出,特丽莎·梅其实早在上周的晚宴上就针对自己的忧虑警告过奥朗德,并且还在法国电力公司( )董事会会议召开前的周三与奥朗德通过一次电话,并且在电话中再次强调了自己的担忧。
如果真是这样,那么这些警告恐怕看起来就有些不明确了。因为至少奥朗德办公室方面认为这些警告没有严重到需要提醒法国电力公司( )的程度。法国电力公司( )的过往记录显示,他们一直在最终投资决定( )上回避这一问题,所以这样的状况再出现一次也不足为奇。这样的结果的确看起来有些令人尴尬,但还不至于造成破坏性影响。
目前辛克立项目面临的问题只会越来越大。关于该项目可行性的质疑层出不穷。法国电力公司(EDF)董事会在这项决议上产生分歧;数位高层经理辞职;联盟开始采取法律措施;评级机构也威胁将会继续下调该公司的信用等级。而在英国,无论是议会、公众、媒体还是其他官方机构,大家的观点都变得更加质疑。B计划出台势在必行。
英国首相为何在如此短的时间内做出这样一个戏剧性的、政治代价高昂的决定?弄懂这一问题一点儿也不比预测九月份之前局势的变化要容易。关于这个项目的争论已经上演过多次。所以到底还要审查些什么呢?其实,在格雷格·卡拉克的声明中我们也许能找到一些端倪。
声明中提到了这样一个模棱两可的说法——要审慎考虑“该项目的所有组成部分”。据悉,本次交易的一个组成部分就是中国为辛克立项目建设提供资金援助,同时允许其在艾克萨斯的布拉德威尔建立一个自己的核反应堆。接受中国的资金是一回事儿,而让一个与中国军方有密切联系的中国企业对英国的电网软件有充分了解,甚至将其反应堆链接到这个电网之上可就是另外一回事儿了。
其实早在一年前,英国首相办公室主任就曾公开对中国参与辛克立核电项目表达过保留意见。如果这些保留意见理由够充分,而且被英国首相采纳,那么这可能就是特丽莎希望进一步审查的方面。如果真是这样,要想在回答这些问题的同时还能继续让中国投资,恐怕的确要有些政治手腕才行。
即便原定上周五举行的文件签署和庆祝仪式继续举行,辛克立项目建设真正开始前,新的反应堆还面临着不小的阻碍。而上周英国首相的突然决定无疑为项目再添一份阴云。
Thursday, August 16, 2018
世界银行气候投资量重于质
在国际货币基金组织和世界银行集团2016年春季会议(4月17日闭幕)召开前夕,世界银行发布《气候变化行动计划》( ),宣布了该组织从现在到2020年的气候变化应对工作计划,时间跨度与《巴黎气候协定》一致。
到2020年,世行计划为气候项目提供290亿美元(折合1874亿元人民币),是目前年均水平的3倍。这样一来,气候融资占世行贷款总额的比重将由21%增加到28%。
世行将其预算的28%投资到气候行动将极大地引起资本市场对可再生能源的关注,支持城市可持续基础设施建设,提高气候灾害弱势社区的气候韧性。
不幸的是,“重量不重质”的老话或许在这里又会上演。比如,《气候行动计划》中多次将水电看作是 “可再生能源”。但是对于世行来说,大型水电项目却是一个长期复杂的历史问题。纳玛达大坝( )和其他一些运动已经引起了全球对大坝造成的人口动迁、生计问题、以及不可逆的环境影响等问题的关注。
然而,在过去的几年里,世行又回到了以前鼓吹大型水坝的立场,认为大型水坝是一条为穷人提供绿色廉价能源的途径,而且还表示其能够“改善”大型水电项目。
2015年12月,来自85个国家的500个组织签署了《支持应对气候变化真正解决措施的公民社会宣言》,呼吁将大型水电项目排除在气候融资之外。
这些组织列举了多条原因,如水坝会破坏河流的天然碳汇功能,对淡水生态系统造成严重破坏等。然而,最有力的一个理由或许就是,大型水坝依靠的是中央电网,因而不太可能覆盖到农村地区。也就是说,这些大型水坝生产的电能更有可能被输送到大型工业项目而不是穷人。
世界银行的计划中另一个引人关注的领域是森林项目。《气候变化行动计划》指出,2002-2015年,世界银行对涉及森林的项目的融资达到了157亿美元(折合1010亿元人民币)。
可是,最近一项研究却显示,森林发展融资(包括面向最贫困国家的优惠融资在内)还不到国际复兴银行与国际开发协会( / )年度总贷款额度的3%。那么问题来了,相对于其在能源、采矿、运输等导致森林退化的领域的投资,那些以林为生的土著村落能够从世界银行的森林投资中获得哪些好处?
《气候变化行动计划》承诺“世界银行集团( )正以应对气候变化为目标。”虽然世行高层官员信誓旦旦地(至少在他们的讲话中)承诺将采取措施应对气候挑战,但在执行层面,他们的同行是否也准备好了呢?
通常情况下,在对项目的气候影响进行审查时,项目工作团队可以酌情采用(世行提供的) “工具箱”或“指引”。
这些文件倾向于更多地聚焦项目带来的气候影响,而不是该项目在面临气候变化相关事件时的韧性。
此外,世界银行若要切实采取行动应对气候问题,就应当将重点放在评估化石能源的替代能源上。
在批准项目之前,世行应该要求对项目整个生命周期内的温室气体排放量进行清算,确定碳的社会成本(即成本效益分析)以及由此考虑替代方案的可行性。
虽然前期评估的价值不言而喻,可是世界银行董事会已经通过了世行管理层新提出的“适应性风险管理”策略。世行将降低对尽责调查的要求,允许贷款国灵活调整开展环境和社会风险评估的时间。
这意味着即使违背了气候安全条例,碳密集型项目也能够获得董事会的批准。这会导致严重的后果,尤其在世行还在考虑贷款给科索沃一个褐煤发电厂的情况下。
此外,世界银行的政策性贷款程序对环境和社会评估的要求更少,而且也不必遵守气候安全条例。
这样一来,世界银行的资金就有可能用于支持鼓励开发化石能源(毫无疑问,其中还包括煤炭)的政策和补贴,从而为一些国家走上碳密集型发展道路奠定基础,而这些国家的贫困人口将会因此而遭受沉重的打击。
世行拟定的28%的气候项目融资目标虽然值得赞许,但问题是怎样才能确保余下72%的融资能够达到其制定的远大的气候目标呢?
到2020年,世行计划为气候项目提供290亿美元(折合1874亿元人民币),是目前年均水平的3倍。这样一来,气候融资占世行贷款总额的比重将由21%增加到28%。
世行将其预算的28%投资到气候行动将极大地引起资本市场对可再生能源的关注,支持城市可持续基础设施建设,提高气候灾害弱势社区的气候韧性。
不幸的是,“重量不重质”的老话或许在这里又会上演。比如,《气候行动计划》中多次将水电看作是 “可再生能源”。但是对于世行来说,大型水电项目却是一个长期复杂的历史问题。纳玛达大坝( )和其他一些运动已经引起了全球对大坝造成的人口动迁、生计问题、以及不可逆的环境影响等问题的关注。
然而,在过去的几年里,世行又回到了以前鼓吹大型水坝的立场,认为大型水坝是一条为穷人提供绿色廉价能源的途径,而且还表示其能够“改善”大型水电项目。
2015年12月,来自85个国家的500个组织签署了《支持应对气候变化真正解决措施的公民社会宣言》,呼吁将大型水电项目排除在气候融资之外。
这些组织列举了多条原因,如水坝会破坏河流的天然碳汇功能,对淡水生态系统造成严重破坏等。然而,最有力的一个理由或许就是,大型水坝依靠的是中央电网,因而不太可能覆盖到农村地区。也就是说,这些大型水坝生产的电能更有可能被输送到大型工业项目而不是穷人。
世界银行的计划中另一个引人关注的领域是森林项目。《气候变化行动计划》指出,2002-2015年,世界银行对涉及森林的项目的融资达到了157亿美元(折合1010亿元人民币)。
可是,最近一项研究却显示,森林发展融资(包括面向最贫困国家的优惠融资在内)还不到国际复兴银行与国际开发协会( / )年度总贷款额度的3%。那么问题来了,相对于其在能源、采矿、运输等导致森林退化的领域的投资,那些以林为生的土著村落能够从世界银行的森林投资中获得哪些好处?
《气候变化行动计划》承诺“世界银行集团( )正以应对气候变化为目标。”虽然世行高层官员信誓旦旦地(至少在他们的讲话中)承诺将采取措施应对气候挑战,但在执行层面,他们的同行是否也准备好了呢?
通常情况下,在对项目的气候影响进行审查时,项目工作团队可以酌情采用(世行提供的) “工具箱”或“指引”。
这些文件倾向于更多地聚焦项目带来的气候影响,而不是该项目在面临气候变化相关事件时的韧性。
此外,世界银行若要切实采取行动应对气候问题,就应当将重点放在评估化石能源的替代能源上。
在批准项目之前,世行应该要求对项目整个生命周期内的温室气体排放量进行清算,确定碳的社会成本(即成本效益分析)以及由此考虑替代方案的可行性。
虽然前期评估的价值不言而喻,可是世界银行董事会已经通过了世行管理层新提出的“适应性风险管理”策略。世行将降低对尽责调查的要求,允许贷款国灵活调整开展环境和社会风险评估的时间。
这意味着即使违背了气候安全条例,碳密集型项目也能够获得董事会的批准。这会导致严重的后果,尤其在世行还在考虑贷款给科索沃一个褐煤发电厂的情况下。
此外,世界银行的政策性贷款程序对环境和社会评估的要求更少,而且也不必遵守气候安全条例。
这样一来,世界银行的资金就有可能用于支持鼓励开发化石能源(毫无疑问,其中还包括煤炭)的政策和补贴,从而为一些国家走上碳密集型发展道路奠定基础,而这些国家的贫困人口将会因此而遭受沉重的打击。
世行拟定的28%的气候项目融资目标虽然值得赞许,但问题是怎样才能确保余下72%的融资能够达到其制定的远大的气候目标呢?
Sunday, August 12, 2018
全球变暖,节气都不准了?
“谷雨前后,种瓜点豆”,按照二十四节气的排序, 4月20日是谷雨——全年的第六个也是春季最后一个节气。
根据中国明代介绍栽培植物的著作《群芳谱》:“谷雨,谷得雨而生也。”谷雨时节,气温转暖,降雨适量,正适合播种。
二十四节气是中国古代的科学,起源于2000多年前的黄河流域。2016年11月,二十四节气被联合国教科文组织列入人类非物质文化遗产代表作名录。
在城镇人口已近六成的当代中国,节气作为农业生产指南的作用已经不复重要。但冬至吃饺子或汤圆、清明扫墓祭祖等与节气紧密相连的习俗依然是大多数中国人下意识遵守的生活习惯。
可以说,农耕文化的衰落并没有让节气过时,因为节气已经深深印刻在中国人的文化基因里。但工业时代带来的气候变化,却实实在在导致了节气的失准。
指导农事的二十四节气
古代中国人通过观察、记录太阳的周年运动轨迹,将其分为24个等份,每一等份15天,为一个“节气”。二十四节气以天象、气温、降水、物候的时序变化为基准,从黄河中下游地区逐渐推广到全中国各地。在国际气象界,这一时间认知体系被誉为“中国的第五大发“惊蛰不耙地,好像蒸锅跑了气”,“小满割不得,芒种割不及”……这样包含了节气的农业谚语不胜枚举。在传统的农耕中国,二十四节气实实在在地指导着农业生产,播种、浇水、施肥、除虫、收割都有节气管着。
立夏提前,立冬推后
然而,在全球变暖的背景下,二十四节气反应物候和气候特征的准确度正在不断降低。
根据中国科学院大气物理研究所副研究员钱诚等人的研究,因为整体变暖的趋势,以1960~2008近半个世纪的时间跨度来看,每一个节气的增温幅度都很显著。
季节循环整体趋于抬升,季节性升温阶段的节气——二十四节气中的前12个——所反应的物候整体提前,而降温阶段的节气——下半年的12个——则显著推迟。同时,满足某个节气气温标准的天数增减也呈两级分化趋势。统计显示,符合小寒、大寒气候特征(平均气温达-3.50℃及以下)的天数越来越少。1998至2007年10年间平均的大寒天数为14天/年,而20世纪60年代为32天/年,减少了一半还多。与之相对应的,1997年到2008年,符合大暑气候特征的天数为年均36天,而在上世纪60年代则为年均20天,增加了八成。原本用于指导农事的节气时令也因气候变暖多有失灵。
以“惊蛰”为例,其字面含义即春雷惊醒冬天藏伏土中、不饮不食的动物,历来被视为春耕开始的日子。但是由于惊蛰的物候及气候特征提前,中原地区的冬小麦需要较经验提前12-16天耙地。
在中国东北地区,原来农民被建议一定要晚耕种,农谚称“立夏到小满,种啥都不晚”。但近年来,随着气候的变暖,耕种时间可以被大规模提前。
节气体现了中国人顺应自然规律的古老哲学,但工业时代以来人类活动对自然的剧烈影响已经使得自然规律本身受到了巨大干扰。当我们深陷“人类世(Anthropocene)”,节气还有多少意义?
根据中国明代介绍栽培植物的著作《群芳谱》:“谷雨,谷得雨而生也。”谷雨时节,气温转暖,降雨适量,正适合播种。
二十四节气是中国古代的科学,起源于2000多年前的黄河流域。2016年11月,二十四节气被联合国教科文组织列入人类非物质文化遗产代表作名录。
在城镇人口已近六成的当代中国,节气作为农业生产指南的作用已经不复重要。但冬至吃饺子或汤圆、清明扫墓祭祖等与节气紧密相连的习俗依然是大多数中国人下意识遵守的生活习惯。
可以说,农耕文化的衰落并没有让节气过时,因为节气已经深深印刻在中国人的文化基因里。但工业时代带来的气候变化,却实实在在导致了节气的失准。
指导农事的二十四节气
古代中国人通过观察、记录太阳的周年运动轨迹,将其分为24个等份,每一等份15天,为一个“节气”。二十四节气以天象、气温、降水、物候的时序变化为基准,从黄河中下游地区逐渐推广到全中国各地。在国际气象界,这一时间认知体系被誉为“中国的第五大发“惊蛰不耙地,好像蒸锅跑了气”,“小满割不得,芒种割不及”……这样包含了节气的农业谚语不胜枚举。在传统的农耕中国,二十四节气实实在在地指导着农业生产,播种、浇水、施肥、除虫、收割都有节气管着。
立夏提前,立冬推后
然而,在全球变暖的背景下,二十四节气反应物候和气候特征的准确度正在不断降低。
根据中国科学院大气物理研究所副研究员钱诚等人的研究,因为整体变暖的趋势,以1960~2008近半个世纪的时间跨度来看,每一个节气的增温幅度都很显著。
季节循环整体趋于抬升,季节性升温阶段的节气——二十四节气中的前12个——所反应的物候整体提前,而降温阶段的节气——下半年的12个——则显著推迟。同时,满足某个节气气温标准的天数增减也呈两级分化趋势。统计显示,符合小寒、大寒气候特征(平均气温达-3.50℃及以下)的天数越来越少。1998至2007年10年间平均的大寒天数为14天/年,而20世纪60年代为32天/年,减少了一半还多。与之相对应的,1997年到2008年,符合大暑气候特征的天数为年均36天,而在上世纪60年代则为年均20天,增加了八成。原本用于指导农事的节气时令也因气候变暖多有失灵。
以“惊蛰”为例,其字面含义即春雷惊醒冬天藏伏土中、不饮不食的动物,历来被视为春耕开始的日子。但是由于惊蛰的物候及气候特征提前,中原地区的冬小麦需要较经验提前12-16天耙地。
在中国东北地区,原来农民被建议一定要晚耕种,农谚称“立夏到小满,种啥都不晚”。但近年来,随着气候的变暖,耕种时间可以被大规模提前。
节气体现了中国人顺应自然规律的古老哲学,但工业时代以来人类活动对自然的剧烈影响已经使得自然规律本身受到了巨大干扰。当我们深陷“人类世(Anthropocene)”,节气还有多少意义?
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